🌏 बलिया। राष्ट्र गीता वंदेमातरम के प्रकरण के डेढ़ सौ साल पूरे होने के मौके पर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया गया। यह गीत प्रथम बार 7 नवंबर 1875 को बंग दर्शन पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।
🎶 स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की अद्भुत भूमिका रही है। सैकड़ों राष्ट्रभक्तों ने इस गीत से प्रेरणा पाई और मातृभूमि पर अपने प्राण न्योछावर किए। विद्यार्थियों में देशभक्ति का भाव भरने और उन्हें स्वतंत्र्यवीरों के बलिदानी भाव से संपृक्त करने के उद्देश्य से जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में राष्ट्रगीत वंदेमातरम का सामूहिक गायन हुआ।
🎤 इस अवसर पर आयोजित समारोह में कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने राष्ट्रगीत की संवेदना को साझा किया। कहा कि इस गीत में राष्ट्र के साकार स्वरूप को माता के रूप में नमन किया गया है। इस गीत के भाव को महसूस करने मात्र से ह्रदय में देशभक्ति का भाव हिलोरे लेने लगता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय कुमार चौबे, और धन्यवाद ज्ञापन चीफ प्राक्टर डॉ. प्रियंका सिंह ने किया।
🎓 इस अवसर पर कुलसचिव एस एल पाल, शैक्षणिक निदेशक डॉ. पुष्पा मिश्रा, डॉ. अजय चौबे, डॉ. विनीत सिंह, डॉ. प्रमोद शंकर पांडेय, डॉ. छबि लाल, डॉ. स्मिता, डॉ. लाल विजय सिंह, डॉ. अनुराधा राय, डॉ. रजनी चौबे, डॉ. मनोज जायसवाल, डॉ. प्रवीण नाथ यादव, डॉ. संदीप यादव, डॉ. सरिता पांडेय, डॉ. रंजना मल्ल आदि प्राध्यापक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
![]()

