बलिया के सत्तू के साथ ही सत्तू वाले बाटी चोखा से भी जनपद को एक नई पहचान मिलने जा रही है।
🌾 सत्तू आधारित उत्पादों में बलिया के बाटी चोखा को ‘एक जिला एक उत्पाद’ के तौर पर चुना गया है। बाटी चोखा को बढ़ावा देने के लिए शु्क्रवार 11 सितंबर को बलिया विकास भवन में एक दिवसीय कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें आधुनिकी पैकेजिंग और हाईजीन मैन्युफैक्चरिंग आदि की जानकारी दी जाएगी।
🛍️ भारतीय पैकेजिंग संस्थान की ओर से आयोजित की जा रही इस कार्यशाला में एक्सपर्ट के द्वारा आधुनिक और निर्यात के अनुकूल पैकेजिंग की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य ‘एक जनपद एक उत्पाद’ के तहत तैयार चीजों की शेल्फ लाइफ को बढ़ाना है।
🔍 इसके साथ ही पर्यावरण के अनुकूल, स्मार्ट और सुरक्षित पैकेजिंग को बढ़ावा देने के तरीके भी इस कार्यशाला में बताए जाएंगे। बड़े बाजारों में स्थानी उत्पादों को प्रतिस्पर्धा करने में मदद के लिए यह आवश्यक भी है। कार्यशाला में और भी जरूरी बातें समझाई जाएंगी जैसे कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों की जानकारी, प्रोडक्ट पर सही लेबलिंग, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस (GMP) और GHP यानी गुड हाइजीन प्रैक्टिसेस के बारे में भी बताया जाएगा।
📦 प्रोडक्ट में QR कोड लगाने, बारकोड, न्यूट्रिशन लेबलिंग, जैसी सुविधाओं को जोड़ने की भी जानकारी दी जाएगी। खाद्य लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बताने के साथ इसके लिए आवेदन करने में भी मदद की जाएगी। छोटे कारोबारीयों को इस कार्यशाला से अपने उत्पादों को बिना किसी रुकावट के बाजार में उतारने में काफी सहायत मिलेगी।
❓ इस कार्यशाला में कौन शामिल हो सकता है? बलिया के विकास भवन में होने वाली इस कार्यशाला में एक जनपद एक उत्पाद के रजिस्ट्रर्ड कारोबारीयों, सत्तू आधारित उत्पाद और बाटी चोखा बनाने वाले दुकानदारों के साथ पैकेजिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों से कार्यशाला में शामिल होने की अपील की गई है।
🗣️ अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यशाला में बाटी चोखा बनाने और इस उद्यम को करने की इच्छा रखनेवाले लोगों को बहुत सीखने को मिलेगा। इससे उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार क्षमता में सुधार होगा जिससे बलिया के पारंपरिक व्यंजन को जिले और प्रदेश से बाहर एक बड़े बाजार में पहुंचने में मदद मिल सकती है।
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