📍 बलिया। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में 10 फरवरी से 28 फरवरी तक फाइलेरिया से बचाव के लिए ट्रिपल ड्रग थेरेपी आईडीए (आइवरमेक्टिन, डीईसी व एल्बेंडाजोल) अभियान चलाया जाएगा। अभियान की तैयारियों को लेकर मंगवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की दूसरी बैठक आयोजित की गई।
🗓️ डीएम बलिया ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन एक अत्यंत महत्वपूर्ण जन स्वास्थ्य अभियान है। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर सम्यबद्ध कार्ययोजना के अनुसार कार्य करें। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में प्रार्थना सभा के माध्यम से बच्चों को जागरूक करने, ग्राम प्रधानों व कोटेदारों से जागरूकता गतिविधियां संचालित कराने तथा अभियान के दिन समुदाय के समक्ष सेवन कर उदाहरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
📝 मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है, जिसके लक्षण 5 से 15 वर्षों बाद सामने आते हैं। यह रोग मच्छरों के काटने से फैलता है और हाथ, पैर, स्तन व अंडकोष में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न करता है, जिससे व्यक्ति दिव्यांगता की स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए वर्ष में एक बार दवा का सेवन आवश्यक है।
💊 वेक्टर जनित रोगों के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि आईडीए अभियान के अंतर्गत एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपने समक्ष दवा खिलाई जाएगी। किसी भी स्थिति में दवा का वितरण नहीं किया जाएगा।
🏥 उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला संक्रामक रोग है, जिसे आमतौर पर हाथीपांव कहा जाता है। जिला मलेरिया अधिकारी राजीव त्रिपाठी ने बताया कि जनपद में अब तक फाइलेरिया के कुल 4264 मरीज चिन्हित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आईडीए अभियान के तहत दी जाने वाली दवाई पूरी तरह सुरक्षित व प्रभावी हैं। दवा सेवन के बाद हल्के दुष्प्रभाव जैसे चक्कर, उल्टी या खुजली इस बात का संकेत हो सकते हैं कि शरीर में मौजूद कीटाणु नष्ट हो रहे हैं।
🌐 वर्ष में एक बार लगातार पांच वर्षों तक दवा खाने से फाइलेरिया संक्रमण से बचाव संभव है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित पंचायत राज, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, अल्पसंख्यक कल्याण, आपूर्ति विभाग के अधिकारी, साथ ही WHO, पाथ, पीसीआई और सीफार संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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