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अगले दो साल में सफेद गेंद क्रिकेट पर राज करेगी भारतीय Women Cricket Team: अमोल मजूमदार

मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने शनिवार को कहा कि आयु वर्ग के क्रिकेट से लगातार उभर रही प्रतिभाओं को देखते हुए भारतीय महिला क्रिकेट टीम अगले दो वर्षों में सफेद गेंद (वनडे और टी20) के प्रारूपों में विश्व क्रिकेट पर लगातार अपना दबदबा कायम करने में सक्षम होगी। भारत ने पिछले साल नवंबर में घरेलू मैदान पर 50 ओवर का विश्व कप जीता था लेकिन टीम अब तक कोई बड़ा टी20 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं जीत पाई है। हालांकि मजूमदार और नयी कप्तान स्मृति मंधाना को इस कमी को दूर करने का मौका मुंबई और वडोदरा में आयोजित होने वाली आईसीसी टी20 चैंपियंस ट्रॉफी में मिलेगा।

मुंबई में मुंबई खेल पत्रकारों के संघ (एसजेएएम) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मजूमदार ने कहा, ‘‘दो साल बाद अगर भारतीय टीम विश्व क्रिकेट पर अपना दबदबा बनाने लगे तो मुझे बहुत खुशी होगी। टीम के भीतर हमने हमेशा दबदबे की बात की है। मैदान पर पूरी आक्रामकता और दृढ़ता के साथ खेलना भी हमारी प्राथमिकता रही है।

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उन्होंने महिला टीम की दो साल बाद की स्थिति से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘निश्चित रूप से, मैं जिस पृष्ठभूमि से आता हूं, मुंबई क्रिकेट में मेरा विकास भी कुछ इसी तरह हुआ है। मैं उन्हीं मूल्यों को टीम में शामिल करने और अपने अनुभव खिलाड़ियों के साथ साझा करने की कोशिश करता हूं। अगर हम विश्व क्रिकेट पर अपना दबदबा कायम करते हैं तो मुझे बेहद खुशी होगी।

’’
मजूमदार ने भरोसा जताया कि भारत टी20 प्रारूप में भी ऐसी टीम बनेगा जिसे हराना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आयु वर्ग के क्रिकेटरों को टी20 क्रिकेट की जरूरतों और चुनौतियों की बेहतर समझ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले से ही उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कई शानदार प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बीसीसीआई के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (सीओई) में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को देखा है जहां अंडर-15, अंडर-19 और भारत ए के शिविर आयोजित होते हैं। सीओई में जिस तरह का काम हो रहा है, वह शानदार है।

ये शिविर इस बात का अच्छा उदाहरण हैं कि वर्तमान में भारतीय महिला क्रिकेट किस दिशा में आगे बढ़ रही है। ’’
मजूमदार ने कहा, ‘‘कई बेहतरीन खिलाड़ी उभरकर सामने आ रही हैं। आपको हैरानी होगी कि वे बहुत जल्दी खेल की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल लेती हैं।

हमें कुछ खास चुनौतियों के अनुसार खुद को ढालने में काफी समय लगा था, लेकिन ये युवा खिलाड़ी पहले से ही उन जरूरतों को समझती हैं। वे पूरी तरह पेशेवर हैं।

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