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Sunil Gavaskar का बड़ा बयान: Pakistani Player को टीम में लेने पर लोगों का गुस्सा स्वाभाविक है

इंग्लैंड में होने वाले एक प्रमुख क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ी चयन के दौरान लिया गया एक फैसला विवाद का कारण बन गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार एक टीम ने पाकिस्तानी स्पिन गेंदबाज अबरार अहमद के साथ कांट्रैक्ट किया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
बता दें कि इस टीम के स्वामित्व से जुड़ा एक भारतीय कारोबारी समूह भी है। इसी कारण कई लोगों ने सवाल उठाए कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में हुए घटनाक्रमों को देखते हुए ऐसा फैसला क्यों लिया गया।
गौरतलब है कि अबरार अहमद को लगभग दो करोड़ तीस लाख रुपये के बराबर राशि में अनुबंधित किया गया है। इस फैसले के बाद सामाजिक माध्यमों पर टीम की काफी आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे असंवेदनशील कदम बताया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भी इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि लोगों की नाराजगी को समझा जा सकता है क्योंकि दोनों देशों के बीच बीते वर्षों में कई गंभीर घटनाएं हुई हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि दो हजार आठ में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद भारतीय क्रिकेट लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जगह नहीं दी गई थी। इसके बाद दो हजार उन्नीस में पुलवामा हमले ने भी दोनों देशों के संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में जम्मू कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले की घटना का भी जिक्र किया गया है, जिसने देश में काफी आक्रोश पैदा किया था। इसी पृष्ठभूमि में कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे हालात में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अनुबंधित करने का फैसला संवेदनशील माना जाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस फैसले के बाद संबंधित टीम के सामाजिक माध्यम खाते को कुछ समय के लिए बंद भी कर दिया गया था क्योंकि आलोचना काफी तेजी से बढ़ रही थी। बाद में स्थिति सामान्य होने के बाद खाता फिर सक्रिय किया गया है।
इस बीच टीम के कोच डेनियल विटोरी ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान एक अन्य पाकिस्तानी स्पिन गेंदबाज उस्मान तारिक पर भी विचार किया गया था। यही बात कई लोगों को और हैरान करने वाली लगी।
गौरतलब है कि सुनील गावस्कर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी भारतीय स्वामित्व वाले समूह को ऐसे फैसलों में देश की संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। उनका मानना है कि खेल महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन राष्ट्रीय भावनाओं और हालात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

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