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इंग्लैंड की लीग को अक्सर दुनिया की सबसे मजबूत लीग माना जाता है, लेकिन इस बार यूरोप की बड़ी प्रतियोगिता में तस्वीर कुछ अलग नजर आई।
बता दें कि प्रीमियर लीग के छह क्लब अंतिम 16 चरण तक पहुंचे थे, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा था। मौजूद जानकारी के अनुसार इससे यह संकेत मिल रहा था कि इंग्लैंड के क्लब इस बार पूरी तरह हावी रहेंगे, लेकिन आगे की तस्वीर उतनी मजबूत नहीं रही।
गौरतलब है कि इन छह टीमों में से चार क्लब जल्दी ही बाहर हो गए, जिनमें मैनचेस्टर सिटी, चेल्सी, न्यूकैसल यूनाइटेड और टॉटनहम हॉटस्पर शामिल रहे। इन मुकाबलों में इंग्लिश टीमों ने कुल 18 गोल किए, जबकि 30 गोल खाए, जो उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े करता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इन टीमों को बाहर करने वाले क्लब कोई नए नाम नहीं थे। रियल मैड्रिड, बार्सिलोना और एटलेटिको मैड्रिड जैसे स्पेन के अनुभवी क्लबों ने अपने अनुभव और रणनीति के दम पर मुकाबले अपने नाम किए हैं।
गौरतलब है कि इन मुकाबलों में सबसे बड़ा अंतर खेल के तरीके में नजर आया है। जहां इंग्लैंड की टीमें तेज गति और लगातार हमले पर भरोसा करती हैं, वहीं स्पेनिश टीमों ने संतुलन और सही समय पर फैसले लेने की रणनीति अपनाई। यह अंतर खासकर नॉकआउट मुकाबलों में साफ दिखाई देता है, जहां एक छोटी गलती भी भारी पड़ सकती है।
बताते चलें कि रियल मैड्रिड ने मैनचेस्टर सिटी को आसानी से हराया, जबकि बार्सिलोना ने न्यूकैसल के खिलाफ आक्रामक और नियंत्रित खेल दिखाया है। वहीं एटलेटिको मैड्रिड और टॉटनहम के बीच मुकाबला भले ही रोमांचक रहा, लेकिन अंत में स्पेनिश टीम ज्यादा संतुलित नजर आई।
मौजूद जानकारी के अनुसार आर्थिक रूप से इंग्लैंड की लीग दुनिया में सबसे आगे है, जहां टीवी अधिकारों से बड़ी कमाई होती है। इसके मुकाबले स्पेन की लीग की कमाई कम है, लेकिन इसके बावजूद मैदान पर प्रदर्शन में यह अंतर उतना नजर नहीं आया।
गौरतलब है कि स्पेन के क्लबों ने अपने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाया है, जो बड़े मुकाबलों में भी आत्मविश्वास के साथ खेलते नजर आए। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीमों के पास बेहतर संसाधन और गहराई होने के बावजूद कई बार खेल में संतुलन की कमी दिखी।
