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“कल प्रधानमंत्री साहब का फोन आया था। उन्होंने बात की शुरुआत मराठी में की। कहा कि मी मराठीत बोलू की हिंदीत? मैं हंसने लगा। इसके बाद वो इतना दिल खोलकर हंसे कि मैंने पहली बार सुना कि हमारे प्रधानमंत्री इतना दिल खोलकर हंसते हैं।” ये देश के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा के लिए मनोनीत हुए उज्जवल निकम कहना है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार लोगों को मनोनीत किया है, जिनमें पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम, केरल के भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर और इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन शामिल हैं। 12 जुलाई की रात गृह मंत्रालय की ओर से इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी। लेकिन उज्जवल निकम को इस बात की जानकारी पीएम मोदी के फोन कॉल पर हुई।
उज्जवल निकम के मुताबिक पीएम मोदी ने उनसे फोन पर ये पूछा कि उन्हें हिंदी में बात करनी चाहिए या मराठी में? उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ़ोन आया था, जिन्होंने उनसे पूछा कि उन्हें हिंदी में बात करनी चाहिए या मराठी में। निकम ने कहा कि पहले तो उन्होंने मराठी में बात की, फिर कहा, क्या मैं मराठी बोल सकता हूँ या हिंदी? जिस लहज़े में उन्होंने यह बात कही, उसे सुनकर मैं हँस पड़ा। इसके बाद उन्होंने मुझसे मराठी में बात की और बताया कि राष्ट्रपति मुझे जिम्मेदारी देना चाहते हैं, जिसके बाद उन्होंने मुझे राष्ट्रपति के फैसले के बारे में बताया।
मैंने तुरंत हाँ कह दिया। उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व का भी धन्यवाद किया। निकम ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूँ कि मैं भारत के राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी और सच्चाई से निर्वहन करूँगा। उन्होंने आगे कहा कि यह मेरे लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम, केरल भाजपा नेता सी सदानंदन मास्टर और इतिहासकार मीनाक्षी जैन के योगदान की सराहना की, जब उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया।
