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सूरत पुलिस ने साइबर गुलामी गिरोह का पर्दाफाश किया, तीन गिरफ्तार

गुजरात के सूरत में पुलिस ने ‘‘साइबर गुलामी’’ गिरोह का भंडाफोड़ किया और म्यांमा में नौकरी दिलाने के बहाने मानव तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और इथियोपिया के 52 बेरोजगार युवाओं को म्यांमा भेजा, जहां उन्हें साइबर अपराधियों के लिए जबरन काम करने पर मजबूर किया गया।

‘साइबर गुलामी’ डिजिटल शोषण का वह स्वरूप है, जिसमें व्यक्तियों को धोखे या बलपूर्वक मानव तस्करी के माध्यम से ऑनलाइन ठगी, फिशिंग अथवा अन्य साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए विवश किया जाता है। यह कार्य अकसर अमानवीय और शोषणपूर्ण परिस्थितियों में कराया जाता है।

आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि गुप्त सूचना के आधार पर सूरत पुलिस ने रविवार को मुख्य साजिशकर्ता उत्तराखंड निवासी नीरव चौधरी (24), उसके सहयोगी पंजाब के जीरकपुर निवासी प्रीत कमानी और सूरत निवासी आशीष राणा को गिरफ्तार कर लिया।

कमानी (21) राजकोट के गोंडल शहर का मूल निवासी है, जबकि राणा (37) तापी जिले के व्यारा तालुका का निवासी है।
साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने हाल ही में इस सूचना की जांच शुरू की थी कि मानव तस्कर बेरोजगार युवाओं को विदेशों में आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव का लालच देकर म्यांमा भेज रहे हैं, जहां उन्हें चीनी साइबर अपराधियों द्वारा संचालित फर्मों के लिए काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

विज्ञप्ति में कहा गया कि इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों की निगरानी की, जिन्हें धोखाधड़ी, गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता के मानव तस्करी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है।

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