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डॉयलाग और डिप्लोमेसी ही रास्ता, खाड़ी देशों में तनाव पर भारत का पहला बयान

भारत ने शनिवार को कहा कि वह ईरान पर अमेरिका (US) और इज़राइल के जॉइंट स्ट्राइक के बाद मिडिल ईस्ट में हाल के हालात को लेकर ‘बहुत चिंतित’ है, और सभी पक्षों के बीच हालात को सुलझाने के लिए ‘बातचीत और डिप्लोमेसी’ की अपील की है। एक बयान में विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि इस इलाके में भारतीय मिशन वहां सभी भारतीय नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं, और उनसे सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को लोकल सिक्योरिटी गाइडेंस का पालन करना चाहिए और मिशन के संपर्क में रहना चाहिए।

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जायसवाल ने कहा, हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं। तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी अपनाई जानी चाहिए। सभी देशों की सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान किया जाना चाहिए।
भारत ने शनिवार को इज़राइल और ईरान दोनों देशों में अपने नागरिकों के लिए अलग-अलग सिक्योरिटी एडवाइज़री जारी की, जिसमें उनसे ईरान पर US-इज़राइली हमलों की रिपोर्ट के बाद बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच “बहुत ज़्यादा सावधानी” बरतने की अपील की गई। एक्स पर पोस्ट की गई एक एडवाइज़री में, तेल अवीव में भारतीय दूतावास ने इज़राइल में भारतीय नागरिकों से इज़राइली अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा।

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नागरिकों को सलाह दी गई कि वे तय शेल्टर के पास रहें, अपने घर या काम की जगह के पास सुरक्षित जगहों को जानें, और अगली सूचना तक इज़राइल के अंदर सभी गैर-ज़रूरी यात्राओं से बचें।

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