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सेना की वर्दी में आए पुतिन, उठाया कागज, भारत पर बड़ा खुलासा

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन अचानक सेना की वर्दी में आए और यह महत्वपूर्ण कागज पढ़ने लगे। इस कागज को पढ़ने के बाद पुतिन ने ऐसा ऐलान किया जो कई देशों को परेशान कर सकता है। पुतिन ने भारत का नाम लेकर बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है। दरअसल भारत से करीब 7000 किमी दूर एक इलाका है जहां दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक बहुत बड़ी जंग शुरू हो चुकी है। बर्फ से ढका यह इलाका आर्कटिक है। पुतिन ने कहा है कि आर्कटिक एक नया जिओपॉलिटिकल फ्रंटियर बन रहा है और अब भारत इसका फायदा उठाने के लिए रूस के साथ आ चुका है। पुतिन ने कहा है कि भारत अब उन देशों में शामिल हो चुका है जो नॉर्दन सी रूट पर कदम रखेंगे। 

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दरअसल रूस भारत को उस आर्कटिक पर लेकर पहुंचा है जहां पर कई बार तापमान -50° तक गिर जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ग्लोबल वार्मिंग के चलते इस इलाके का तापमान बढ़ने लगा। बर्फ पिघलने लगी और बर्फ पिघलने के बाद कई नए रास्ते खुलने शुरू हो गए। बर्फ पिघलने की वजह से आर्कटिक से आने-जाने के नए शिपिंग रूट तैयार हो रहे हैं। इन नए शिपिंग रूट्स का इस्तेमाल अब व्यापार, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। अब इन्हीं शिपिंग रूट्स पर दावा ठोकने के लिए रूस ने भारत के साथ एक बड़ा प्लान तैयार कर लिया है। आर्कटिक की बर्फ पिघलने से तीन मुख्य शिपिंग रूट्स तैयार हो रहे हैं। इनमें पहला है नॉर्थ वेस्ट पैसेज, दूसरा है ट्रांस पोलर सी रूट और तीसरा है नॉर्दन सी रूट। भारत के लिए नॉर्दन सी रूट सबसे महत्वपूर्ण है। अभी तक इस इलाके में भारत ने सिर्फ एक उंगली रखी है लेकिन अब पैर जमाने की बारी आ गई है। 

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आपको बता दें कि आर्कटिक के विशाल बर्फीले इलाकों को लेकर रूस, अमेरिका, यूरोप और चीन के बीच वर्चस्व की जंग शुरू हो चुकी है। यह इलाका भारत से दूर है, लेकिन भारत के लिए बहुत जरूरी है। इसीलिए अब रूस भारत को इस इलाके में रणनीतिक बढ़त दिलवा सकता है। आपको बता दें कि आर्कटिक किसी एक देश का नहीं है। आर्कटिक आठ तटीय देशों में बंटा हुआ है। जिनमें कनाडा, डेनमार्क, ग्रीनलैंड, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और अमेरिका शामिल हैं। डॉनल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा इसीलिए करना चाहते हैं ताकि आर्किटिक में अमेरिका की पकड़ और दावेदारी मजबूत हो जाए। भारत इस इलाके में फिलहाल हिमाद्री रिसर्च स्टेशन के जरिए साइंटिफिक रिसर्च का काम कर रहा है। लेकिन भारत अब इस इलाके में अपनी मौजूदगी को बढ़ाना चाहता है। लेकिन आपके मन में सवाल होगा कि आर्कटिक के पीछे इतनी बड़ी जंग शुरू क्यों हुई है? ऐसे में आपको बता दें कि आर्किटिक की बर्फीली जमीन के नीचे रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स, तेल और गैस के असीम भंडार हैं। आर्कटिक की जमीन के नीचे अरबों का खजाना दबा है। ऐसे में जब इस इलाके की बर्फ पिघल रही है तो खजाना निकालना भी आसान हो गया है। बर्फ पिघल रही है तो आर्कटिक तक पहुंचना भी आसान हो रहा है। ऐसे में रूस भारत के साथ मिलकर बहुत एक्टिव हो गया है। रूस इस इलाके में बड़ा दावेदार है। लेकिन रूस के पास इतने रिसोर्सेज नहीं है कि वो अकेले ही इस इलाके पर अपना वर्चस्व बना पाए क्योंकि यहां पर रूस अमेरिका और यूरोपीय दुश्मनों से घिरा है। 

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