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नई दिल्ली। दिवाली का त्यौहार आते ही कंपनियां कर्मचारियों को बोनस और गिफ्ट देने की तैयारी में जुट जाती हैं। कई निजी और सरकारी संस्थान अपने कर्मचारियों को उत्सव बोनस के रूप में एक अतिरिक्त रकम या उपहार देते हैं। लेकिन खुश होने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि हर बोनस या गिफ्ट टैक्स फ्री नहीं होता। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, बोनस एक निश्चित सीमा तक ही टैक्स फ्री माना जाता है, उसके बाद वह आपकी आय का हिस्सा बन जाता है और उस पर टैक्स देना पड़ता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी को दिवाली पर 5,000 रुपये से कम मूल्य का उपहार मिलता है जैसे मिठाई का डिब्बा, कपड़े या कोई छोटा गैजेट तो वह टैक्स के दायरे में नहीं आता। लेकिन यदि किसी कर्मचारी को इससे अधिक मूल्य का गिफ्ट मिलता है, जैसे कि महंगे इलेक्ट्रॉनिक आइटम या आभूषण, तो उस पर आयकर नियमों के तहत कर लगाया जाता है।
बता दें कि नियोक्ता द्वारा दिया गया गिफ्ट यदि 5,000 रुपये से अधिक का है, तो उसका पूरा मूल्य कर्मचारी की वार्षिक आय में जोड़ दिया जाता है और उसे नियमित वेतन आय की तरह टैक्स देना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि गिफ्ट की कीमत आपकी इनकम का हिस्सा मानी जाती है, और उस पर उसी स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, जिसमें आप पहले से आते हैं।
गौरतलब है कि नकद बोनस को लेकर आयकर विभाग का नियम और भी सख्त है। नकद बोनस को हमेशा वेतन का हिस्सा माना जाता है, चाहे उसकी राशि कितनी भी हो। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी को दिवाली पर 30,000 रुपये का बोनस मिलता है, तो यह रकम उसकी कुल वार्षिक आय में जोड़ी जाएगी और उसके आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
जानकारों का कहना है कि कर्मचारियों को अपने टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय इन बोनस और गिफ्ट की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में टैक्स अधिकारियों से किसी तरह की परेशानी न हो।
सीधे शब्दों में कहें तो, दिवाली पर मिलने वाले उपहार और बोनस भले ही खुशी का कारण बनें, लेकिन कर नियमों की नजर में यह आपकी आय का हिस्सा माने जाते हैं। छोटे उपहार 5,000 रुपये तक टैक्स फ्री हैं, लेकिन उससे अधिक की कोई भी रकम या गिफ्ट सरकार के टैक्स नियमों के दायरे में आते हैं। इसीलिए बोनस मिलने की खुशी के साथ टैक्स जिम्मेदारी का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है हैं।
