एक तरफ जहां पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की ने आपस में गठबंधन किया, डिफेंस डील किया और शेखी बघारी तो दूसरी तरफ इजराइल ने भी तुर्की और पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा लग रहा है कि मोर्चा खोल दिया है। इजराइल के विदेश मंत्रालय ने जहां ट्वीट करके तुर्कियों पर यह आरोप लगाया है कि तुर्की लगातार आतंकी संगठन हमास को फलने फूलने की जगह दे रहा है तो दूसरी तरफ जो तुर्की का दूतावास भारत में मौजूद है। हमास का फुटप्रिंट अब पाकिस्तान में खूब बढ़ रहा है और यह चिंता का कारण है। सबसे पहले बात कर लेते हैं तुर्की पर लगे आरोप की। तो इजराइल के विदेश मंत्रालय ने एक रिपोर्ट ट्वीट करते हुए लिखा है कि तुर्की एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के बजाय जिहादी हमास को पनाह दे रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास अपनी ज्यादातर गुप्त गतिविधियां जिसमें प्लानिंग साइबर ऑपरेशन शामिल है उसको तुर्की के इलाके में ले जा रहा है।
इसे भी पढ़ें: Middle East Crisis | लेबनान की संप्रभुता और Hezbollah का खात्मा, US General के साथ President Aoun की बड़ी चर्चा
जो देश आतंकवादियों को प्लानिंग संगठन बनाने लोगों को भर्ती करने की जगह देता है वो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। इस पूरे मामले पर जो कान है उसकी एक रिपोर्ट भी सामने है। उसमें कहा गया है कि हमास अपनी कुछ संगठनात्मक गतिविधियां जिसमें प्लानिंग साइबर विभाग शामिल है उसे तुर्की शिफ्ट कर रहा है। फिलिस्तीनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि तुर्की में ट्रांसफर होने वाली गतिविधियों में हमास की ज्यादातर गुप्त गतिविधियां शामिल है। जबकि क़तर इस आतंकवादी संगठन के नेतृत्व और सार्वजनिक गतिविधियों की मेजबानी करता रहेगा। कान के मुताबिक क़तर में सुरक्षा बलों ने हमास के नेताओं की अपनी इलाके में आवाजाही पर रोक लगा दी है और उन्हें किसी भी आधिकारिक बैठक के लिए इजाजत लेने की जरूरत होती है। यह हमास के खालील अल हया को अपना नेता नियुक्त करने के फैसले का नतीजा है जिसे क़तर ने पसंद नहीं किया है। इसके बजाय क़तर ने खालिद मशाल को समर्थन किया जिसके ईरान समर्थित अल हया की तुलना में क़तर के करीबी संबंध थे।
इसे भी पढ़ें: अब कैंची अटैक की तैयारी में हूती, सऊदी पर होगा दो तरफा हमला?
वहीं इजराइल की तरफ से पाकिस्तान पर भी आरोप लगाया गया है। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह कहा गया है कि 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले के बाद से कई सूत्रों ने दक्षिण एशिया में हमास की बढ़ती मौजूदगी की ओर इशारा किया है। हमास और पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादी समूहों के बीच मजबूत संबंध आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। इजराइल ने जिस रिपोर्ट को शेयर किया है उसमें लिखा गया है कि नरसंहार के बाद लगातार हमास के प्रमुख नेता पाकिस्तान की यात्रा पर हैं। जहां उन्हें खुले तौर पर सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करना और फिलिस्तीन के समर्थन में सम्मेलनों में भाग लिया और वहीं पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की प्लानिंग भी हो रही है। साफ तौर पर इज़राइल के निशाने पर तुर्की और पाकिस्तान है। डिफेंस डील के बाद इज़राइल का इस तरह से खुलेआम यह लिखना, यह दावा करना बताता है कि चाहे पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी और भी कितने देश एक साथ आ जाएं। हमास के खिलाफ अपनी नीति से इजराइल पीछे हटने वाला नहीं है।