📰 बलिया: जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही, भ्रष्टाचार की शिकायतें आईं दिन आती रहती हैं। इस बीच सामाजित कार्यकर्ता प्रेम वर्मा ने जिला अस्पताल में आम जनता को शासान के अनुरूप सुविधाएं न मिलने और भ्रष्टाचार चरम पर होने का आरोप लगाते हुए सीएमएस को पत्रक सौंपा है।
📄 प्रेम वर्मा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपे पत्र में जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और तत्काल सुधार की मांग की है। प्रेम वर्मा का आरोप है कि जिला अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर समय पर ओपीडी में नहीं बैठते और अपने निजी आवास पर 300 से 400 रुपये लेकर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं।
🏥 ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में उपकरण या सुविधा न होने का बहाना बनाकर मरीजों से भारी रकम निजी आवास या निजी मेडिकल स्टोर पर जमा कराई जाती है। कई मामलों में मरीजों का ऑपरेशन निजी अस्पतालों में कराकर बाद में उन्हें फिर से सरकारी अस्पताल में भर्ती दिखा दिया जाता है।
📉 उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिन हो या रात, मरीजों को कमीशन वाली बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं, जबकि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की दवाएं जानबूझकर नहीं लिखी जातीं। रात में इमरजेंसी वार्ड में पहुंचते ही 500 से 2000 रुपये तक की बाहरी दवाएं लिख दी जाती हैं।
🚑 ट्रॉमा सेंटर में इलाज के नाम पर सिर्फ मरहम-पट्टी होने की बात भी सामने रखी गई है।
🕒 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें
💊 इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे कम से कम दो डॉक्टर और तीन फार्मासिस्ट की तैनाती। 24 घंटे ईसीजी और हार्ट अटैक से जुड़ी मशीनें उपलब्ध कराना।
🏥 इमरजेंसी वार्ड में निजी मेडिकल स्टोर और जांच केंद्रों की पूर्ण पाबंदी। ओपीडी में बाहर की दवा और जांच लिखने पर रोक, जन औषधि केंद्र की दवाएं अनिवार्य।
🔬 डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई। सभी ऑपरेशनों के सरकारी शुल्क सार्वजनिक करना।
🩺 ओपीडी में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति और ड्यूटी रोस्टर सार्वजनिक करना।
🩹 इमरजेंसी में जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
🏢 ट्रॉमा सेंटर को पूरी तरह कार्यशील करना।
🔍 आम जनता की शिकायतों के लिए 24×7 निशुल्क हेल्पलाइन शुरू करना।
📢 प्रेम वर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो सभी समाजसेवियों और विहिप संगठनों के साथ मिलकर जिला अस्पताल परिसर में धरना या आमरण अनशन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी।
⚖️ यह मामला जिला अस्पताल की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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