भारतीय शतरंज लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और देश के युवा खिलाड़ी दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। इसी कड़ी में भारत को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। तमिलनाडु के कन्याकुमारी के रहने वाले 17 वर्षीय अश्वत एस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के 98वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल कर लिया है। उनकी इस सफलता से भारतीय शतरंज जगत में खुशी की लहर है और अब देश के 100वें ग्रैंडमास्टर बनने की दिशा में भी कदम तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अश्वत एस ने 2026 पुणे अंतरराष्ट्रीय ग्रैंडमास्टर राउंड रॉबिन शतरंज प्रतियोगिता में अपना अंतिम ग्रैंडमास्टर मानक हासिल किया। प्रतियोगिता के अंतिम दौर में उन्हें ग्रैंडमास्टर बनने के लिए जीत की जरूरत थी और उन्होंने इस चुनौती को शानदार तरीके से पूरा किया। अश्वत ने काले मोहरों से खेलते हुए अमेरिका के फिडे मास्टर कन्नन वैद्यनाथन को हराकर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
बता दें कि ग्रैंडमास्टर बनने के लिए किसी भी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ द्वारा निर्धारित तीन ग्रैंडमास्टर मानक पूरे करने के साथ निर्धारित रेटिंग भी हासिल करनी होती है। अश्वत एस ने अंतिम मुकाबले में जीत के साथ यह सभी आवश्यक शर्तें पूरी कर ली हैं और अब आधिकारिक रूप से भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बन गए हैं।
गौरतलब है कि अश्वत एस का इस प्रतियोगिता में प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा। उन्होंने कुल 9 दौर में 7 अंक हासिल किए। इस दौरान उन्होंने 6 मुकाबलों में जीत, 2 मुकाबले बराबरी पर समाप्त किए और उन्हें केवल 1 मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने प्रतियोगिता में दूसरा स्थान भी हासिल किया है।
हालांकि प्रतियोगिता की शुरुआत उनके लिए आसान नहीं रही थी। शुरुआती दौर में उन्हें भारत के अनुभवी ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इसके बाद अश्वत ने शानदार वापसी की और लगातार बेहतरीन खेल दिखाते हुए अंतिम दौर तक अपनी उम्मीदें बरकरार रखीं। निर्णायक मुकाबले में जीत दर्ज कर उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
बता दें कि अश्वत एस ने अपने पहले ग्रैंडमास्टर मानक की उपलब्धि पिछले वर्ष ग्रेनके ओपन प्रतियोगिता में हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने दिसंबर 2025 में बुडापेस्ट में आयोजित फर्स्ट सैटरडे ग्रैंडमास्टर राउंड रॉबिन प्रतियोगिता में अपना दूसरा ग्रैंडमास्टर मानक पूरा किया था। इसी प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने 2500 रेटिंग अंक का महत्वपूर्ण स्तर भी पार कर लिया था, जो ग्रैंडमास्टर बनने की अनिवार्य शर्तों में शामिल माना जाता है।
भारतीय शतरंज ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी मजबूत पहचान बनाई है। देश के कई युवा खिलाड़ी विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। यही कारण है कि भारत आज विश्व शतरंज की सबसे मजबूत ताकतों में गिना जाने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में उभरती युवा प्रतिभाओं के कारण आने वाले समय में भारत विश्व शतरंज में और भी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
अश्वत एस की यह सफलता केवल उनके व्यक्तिगत करियर की उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। अब देश की नजर 99वें और ऐतिहासिक 100वें ग्रैंडमास्टर पर भी टिकी हुई है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तेजी से भारतीय युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर रहे हैं, उसे देखते हुए यह उपलब्धि भी जल्द ही देश के नाम दर्ज होने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।