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Football का महासंग्राम FIFA World Cup 2026, जानें प्रतिष्ठित Golden Boot का पूरा इतिहास और सच

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 9 जून से होने जा रहा है, जहां इस बार 48 देश फीफा का खिताब जीतने के लिए मैदान में उतरेंगे। इस बड़े मंच पर जहां टीमें ट्रॉफी के लिए लड़ेंगी, वहीं दुनिया भर के दिग्गज फुटबॉलर ‘गोल्डन बूट’ का प्रतिष्ठित अवॉर्ड अपने नाम करने की कोशिश करेंगे। साल 2022 में यह अवॉर्ड फ्रांस के स्टार खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे ने जीता था।

क्या है गोल्डन बूट और इसका इतिहास?

गोल्डन बूट का खिताब फीफा विश्व कप टूर्नामेंट के दौरान सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है। यह फुटबॉल की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत सम्मानों में से एक है। आधिकारिक तौर पर यह पुरस्कार 1982 से दिया जा रहा है, तब इसे ‘गोल्डन शू’ कहा जाता था। साल 2010 में इसका नाम बदलकर ‘गोल्डन बूट’ कर दिया गया। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले को गोल्डन बूट, दूसरे नंबर वाले को सिल्वर बूट और तीसरे नंबर वाले खिलाड़ी को ब्रॉन्ज बूट दिया जाता है। इस अवॉर्ड के साथ कोई नकद राशि (मोनेटरी प्राइज) नहीं मिलती, यह केवल एक मानद सम्मान है।

असली सोने का नहीं होता गोल्डन बूट

फीफा वर्ल्ड कप में टॉप गोल स्कोरर को दी जाने वाली यह चमचमाती गोल्डन बूट ट्रॉफी पूरी तरह सोने की नहीं होती है। यह दरअसल पीतल की एक मिश्र धातु से बनाई जाती है, जिसके ऊपर सोने की परत चढ़ाई जाती है। इस ट्रॉफी का कुल वजन लगभग 1 किलोग्राम होता है।

कैसे तय होता है विजेता?

यूं तो टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी को सीधे गोल्डन बूट दे दिया जाता है। लेकिन अगर दो या दो से ज्यादा खिलाड़ियों के गोलों की संख्या बराबर हो जाए, तो विजेता का फैसला करने के लिए फीफा खास टाईब्रेकर नियमों का इस्तेमाल करता है।
पहला नियम: यदि गोल बराबर हैं, तो देखा जाता है कि किस खिलाड़ी ने गोल करने में अपने साथियों की ज्यादा मदद की है (यानी जिसके नाम ज्यादा ‘असिस्ट’ होते हैं, उसे विजेता माना जाता है)।
दूसरा नियम: यदि असिस्ट की संख्या भी बराबर रहती है, तो यह पुरस्कार उस खिलाड़ी को दिया जाता है जिसने मैदान पर खेल में सबसे कम मिनट बिताए हों (यानी कम समय में ज्यादा गोल किए हों)। इस तरह यह अवॉर्ड खिलाड़ी की बेहतरीन स्कोरिंग क्षमता और मैदान पर उसकी टाइमिंग को दर्शाता है।

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