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Norway Chess 2026 में प्रज्ञानानंदा का दबदबा, World No.1 Magnus Carlsen को फिर दी मात।

नॉर्वे शतरंज प्रतियोगिता 2026 में भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने एक बार फिर दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराकर बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। ओस्लो में खेले गए इस मुकाबले ने शतरंज जगत में एक बार फिर प्रज्ञानानंदा और कार्लसन की बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को चर्चा के केंद्र में ला दिया हैं।
बता दें कि प्रज्ञानानंदा ने इससे पहले साल 2024 में भी इसी प्रतियोगिता में मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हराया था। उस जीत को उनके करियर का बड़ा मोड़ माना गया था और अब 2026 में मिली यह जीत उनके लगातार बेहतर होते प्रदर्शन का संकेत मानी जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार मुकाबले की शुरुआत काफी संतुलित रही, लेकिन मध्य खेल में प्रज्ञानानंदा ने बेहद धैर्य और सटीक चालों से कार्लसन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हालांकि समय की कमी के दौरान कार्लसन ने वापसी की कोशिश की, लेकिन आखिर में उनसे एक बड़ी गलती हो गई जिसके बाद उन्हें हार स्वीकार करनी पड़ी है।
गौरतलब है कि इस टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन का प्रदर्शन अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। समय प्रबंधन और दबाव में गलत चालें उनके लिए लगातार परेशानी बनती दिख रही हैं। वहीं दूसरी ओर प्रज्ञानानंदा का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता नजर आ रहा हैं।
इसी प्रतियोगिता में मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश डोम्माराजू और अलीरेजा फिरोजा के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद खेले गए आर्मागेडन टाईब्रेकर में अलीरेजा फिरोजा ने जीत दर्ज कर अतिरिक्त अंक अपने नाम किए।
वहीं दूसरे मुकाबले में विंसेंट कीमर और वेस्ली सो के बीच क्लासिकल बाजी बराबरी पर खत्म हुई। बाद में आर्मागेडन मुकाबले में वेस्ली सो ने जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक जुटाए हैं। तीन दौर के बाद अलीरेजा फिरोजा अंक तालिका में शीर्ष पर बने हुए हैं।
महिला वर्ग में अन्ना मुजिचुक और भारतीय खिलाड़ी हम्पी कोनेरू के बीच मुकाबला ड्रॉ रहा। हालांकि आर्मागेडन टाईब्रेकर में अन्ना मुजिचुक ने बाजी मार ली। दूसरी ओर दिव्या देशमुख ने बिबिसारा अस्साउबायेवा के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए आर्मागेडन मुकाबले में जीत दर्ज की।
भारतीय शतरंज के लिए यह टूर्नामेंट काफी खास माना जा रहा हैं क्योंकि युवा खिलाड़ी लगातार दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती देते नजर आ रहे हैं। खास तौर पर प्रज्ञानानंदा की यह जीत आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए भारतीय शतरंज को नई उम्मीद दे रही है।

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