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20 साल और 127 गवाहों के बाद, CBI कोर्ट कांग्रेस नेता की हत्या के मामले में फ़ैसला सुनाएगी

मुंबई की एक स्पेशल CBI कोर्ट अपना फ़ैसला सुनाने वाली है। यह मामला महाराष्ट्र के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्या के मामलों में से एक है, जिसमें उस्मानाबाद (जिसे अब धाराशिव के नाम से जाना जाता है) के शिवसेना (UBT) सांसद ओमराजे निंबालकर और BJP विधायक राणाजगजीतसिंह पद्मसिंह पाटिल के परिवार शामिल थे। यह फ़ैसला आठ आरोपियों के ख़िलाफ़ सुनाया जाएगा, जिनमें राणाजगजीतसिंह पाटिल के पिता पद्मसिंह पाटिल भी शामिल हैं, जो अब 86 साल के हैं। पद्मसिंह पाटिल 1980 के दशक के आखिर में महाराष्ट्र के गृह मंत्री रहे और उन्होंने कई कैबिनेट विभाग संभाले। हत्या के समय वे विधायक थे और बाद में धाराशिव से सांसद बने। 

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उनकी बहन सुनेत्रा पवार अभी महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम हैं और अजित पवार की पत्नी हैं। ओमराजे निंबालकर के पिता, पवनराजे निंबालकर, मराठवाड़ा इलाके के एक बड़े कांग्रेस नेता थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, एनसीपी के बड़े नेता पद्मसिंह पाटिल उन्हें अपने लिए राजनीतिक खतरा मानते थे। 3 जून 2006 को पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर कलांबोली के पास स्कोडा कार से जा रहे थे, तभी दूसरी गाड़ी में सवार हमलावरों ने उन्हें रोका। हमलावरों ने निंबालकर की कार को जबरन रुकवाया और गोलीबारी की, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई और हमलावर वहां से भाग गए। 

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जल्द ही धमकी देने और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग (पैसे देकर हत्या करवाने) के आरोप सामने आए, जिसके बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। एजेंसी के मुताबिक, निंबालकर की हत्या के लिए हत्यारों को 30 लाख रुपये दिए गए थे। इस मामले में पद्मसिंह पाटिल और आठ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में आरोपियों में से एक सरकारी गवाह बन गया और उसे माफ़ी दे दी गई। पिछले 20 सालों में यह मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में तेज़ी लाई और तीन बार इसकी समय-सीमा बढ़ाई। 127 गवाहों के बयान और उनसे जिरह के बाद, कई महीनों तक चली लंबी अंतिम बहस के साथ यह मामला पूरा हुआ।

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