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अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया गिरफ्तार PM-CM को हटाने वाला बिल, विपक्ष ने जमकर किया विरोध

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विवादास्पद विधेयक पेश किया, जिसमें प्रस्ताव है कि यदि किसी मौजूदा मंत्री, मुख्यमंत्री या यहां तक कि प्रधानमंत्री को पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है, तो उन्हें एक महीने के भीतर अपना पद गंवाना पड़ सकता है। अमित शाह ने लोकसभा में संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए। हालांकि, इस दौरान विपक्ष का जोरदार हंगामा जारी रहा। विपक्ष ने इस बिल को जमकर विरोध किया। 
 

केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 के उद्देश्यों और कारणों संबंधी बयान के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम, 1963 (1963 का 20) के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों के कारण गिरफ्तार और हिरासत में लिये गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करने हेतु केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम, 1963 की धारा 45 में संशोधन करने की आवश्यकता है। विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों के अनुसार, संविधान के तहत गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और हिरासत में लिये गए मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए ऐसे मामलों में प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री तथा राज्यों एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद के किसी मंत्री को हटाने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करने के मकसद से संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239एए में संशोधन की आवश्यकता है। विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है। 
 

संविधान (130वां संशोधन) विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः ही पद से हटा दिया जाएगा। हालाँकि, जिस अपराध के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया है, उसकी सज़ा पाँच साल या उससे ज़्यादा होनी चाहिए। इस प्रकार, अगर उन्हें दोषी नहीं भी ठहराया जाता है, तो भी उन्हें उनके पदों से हटाया जा सकता है। यह कानून उन्हें उन सरकारी कर्मचारियों के बराबर लाता है, जिन्हें गिरफ़्तार होने पर निलंबित कर दिया जाता है।

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