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US-Iran Peace Talks । 21 घंटे की मैराथन बैठक बेनतीजा, दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे

ईरान और अमेरिका के बीच शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई पहले दौर की बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कर दिया कि वार्ता नाकाम रही है और इसके लिए उन्होंने ईरान के कड़े रुख को जिम्मेदार ठहराया है।

वार्ता में क्या हुआ?

शनिवार को शुरू हुई यह चर्चा करीब 15 घंटे और कुल मिलाकर 21-25 घंटे तक चली। जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंबी चर्चा के बावजूद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं। उन्होंने कहा, ‘बुरी खबर यह है कि हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके क्योंकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल हमारी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था।’

किन मुद्दों पर फंसा पेंच?

अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे। ट्रंप का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। वहीं, ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका वह सब कुछ बातचीत से हासिल करना चाहता है जो वह युद्ध से नहीं जीत सका। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नहीं छोड़ेगा।
 

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ईरान की 10 प्रमुख शर्तें

ईरान ने अपनी शर्तों को बहुत स्पष्ट और कड़ा रखा है। ईरान की मांग है कि अमेरिका उस पर कोई हमला न करे और अपनी आक्रामकता पूरी तरह छोड़ दे। साथ ही, वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और यूरेनियम संवर्धन का अधिकार भी अपने पास रखना चाहता है। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका उस पर लगे सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाए और संयुक्त राष्ट्र व अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रस्तावों को खारिज किया जाए। इसके अलावा, ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और लेबनान समेत अन्य मोर्चों पर हमलों को तुरंत रोकने की भी मांग की है।

अमेरिका की 3 मुख्य मांगें

इस शांति वार्ता के दौरान अमेरिका ने ईरान के सामने अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं। पहली और सबसे बड़ी मांग यह थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद कर दे। दूसरी शर्त के तहत अमेरिका चाहता था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को 28 फरवरी से पहले की स्थिति की तरह सामान्य बनाया जाए। इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी रहेगा। इन कड़े प्रस्तावों को लेकर ही दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई।
 

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आगे क्या होगा?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि यह बातचीत 40 दिनों के युद्ध के बाद पैदा हुए अविश्वास के माहौल में हुई थी, इसलिए एक बार में समझौते की उम्मीद नहीं थी। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और जेडी वेंस वापस अमेरिका लौट रहे हैं। वार्ता विफल होने के बाद अब क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने और युद्ध शुरू होने की आशंका गहरा गई है।

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