![]()
Breaking News
📰 कलेक्टरेट सभागार में बृहस्पतिवार को जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा समिति की बैठक जिलाधिकारी मंगला…
📰 जनपद में बहुप्रतीक्षित जिला कारागार निर्माण के लिए शासन ने हरी झंडी दे दी…
📰 कलेक्टरेट सभागार में बुधवार को सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों एवं निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों का…
भारत के टी20 विश्व कप विजेता सूर्यकुमार यादव ने पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय कप्तानी से हटाए…
जब आसमान से मौत बरस रही थी और इमारतें मलबे में तब्दील हो रही थी…
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में इजराइल ने ऐसा तहलका मचा दिया जैसा…
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को लगातार दो आईपीएल खिताब दिलाने के बावजूद, रजत पाटीदार को आयरलैंड…
भारतीय महिला हॉकी टीम ने शनिवार को यहां कोरिया के खिलाफ तीसरे स्थान के मैच…
( चीन में भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने कहा है कि दो सहस्राब्दियों से अधिक…
न्यू चंडीगढ़ में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच के पहले दिन…
वाशिंगटन । अमेरिका में बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया है कि वह बांग्लादेश में धार्मिक एवं जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी अत्याचार के संबंध में हस्तक्षेप करें। उन्होंने इस्लामी ताकतों से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए ‘‘अस्तित्व का संकट’’ उत्पन्न होने का खतरा बताते हुए ट्रंप से बांग्लादेश में उनकी रक्षा में मदद का अनुरोध किया है। हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने के लिए ट्रंप से आग्रह करते हुए समूह ने कहा कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ का खतरा बढ़ रहा है।
जिसका न केवल दक्षिण एशिया, बल्कि शेष विश्व पर भी दूरगामी प्रभाव हो सकता है। ट्रंप को संबोधित एक ज्ञापन में समूह ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में बांग्लादेश की भागीदारी को आंतरिक जातीय और धार्मिक उत्पीड़न की समाप्ति से जोड़ने का सुझाव दिया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ज्ञापन में अल्पसंख्यकों और स्वदेशी समूहों को आधिकारिक तौर पर मान्यता देने के लिए एक व्यापक अल्पसंख्यक संरक्षण अधिनियम का भी प्रस्ताव रखा गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, प्रमुख सिफारिशों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों की स्थापना, अल्पसंख्यकों के लिए अलग चुनावी व्यवस्था और धार्मिक प्रथाओं एवं सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए अपराध को भड़काने वाले एवं नफरती भाषण के खिलाफ कानून बनाना शामिल है।
