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पनडुब्बियां ठप, डॉकयार्ड में जंग खाते जहाज, ऑपरेशन सिंदूर की चोट से अब तक नहीं उबर पाई पाकिस्तानी नेवी

ऑपरेशन सिंदूर के कुछ सप्ताह बाद भी पाकिस्तान की नौसेना अपने ही समुद्र से गायब है। पाक नौसेना आज पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है, जो खस्ताहाल युद्धपोतों, विफल चीनी तकनीक, खोखली पनडुब्बी शाखा और गिरते मनोबल से ग्रसित नजर आ रही है। जब भारत की नौसेना अटैकिंग मोड में नजर आया और गहरे समुद्र में निगरानी करने तक का पूरा प्रभुत्व दिखाया, तब पाकिस्तान का नौसैनिक बेड़ा दूर दूर तक नजर नहीं आया। 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तानी नौसेना दहशत में है?

भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू चलाया तो हिंद की सेना ने न केवल हवाई और ज़मीनी हमले का समर्थन किया, बल्कि अरब सागर को भी घेर लिया। भारतीय नौसेना के कैरियर बैटल ग्रुप ने पाकिस्तान के हवाई और समुद्री तत्वों के लिए एक तरह से नो-एक्सेस ज़ोन बना दिया। मिग-29K विमानों ने ऊपर से गश्त की। स्टील्थ फ्रिगेट्स ने रडार साइलेंस लागू किया। कराची बंदरगाह पर नज़र रखी जा रही थी और पाकिस्तानी नौसेना तो मानो इसे देखकर अंडरग्राउंड हो गई हो। ऑपरेशन के दौरान या बाद में एक भी लड़ाकू जहाज ने भारत के प्रभुत्व को चुनौती नहीं दी। पाकिस्तान के प्रमुख युद्धपोत हफ़्तों से कराची से बाहर नहीं निकले हैं। जब भारत ने अपने मिसाइल परीक्षणों और समुद्र से की गई उड़ानों को सार्वजनिक किया, तब भी इस्लामाबाद तैयारी का दिखावा करने के लिए छेड़छाड़ की गई तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए भी तस्वीरों को मैनेज करने के लिए संघर्ष कर रहा था। एक वायरल तस्वीर एडिट की हुई निकली, जिसमें एक मिसाइल लॉन्च दिखाया गया था जो कभी हुआ ही नहीं।

पाकिस्तान के युद्धपोत खस्ता हाल में पड़े

इस संकट की जड़ में पाकिस्तान का खस्ताहाल बेड़ा है। उसकी नौसेना की रीढ़ अभी भी 1990 के दशक में हासिल किए गए ब्रिटिश मूल के टाइप-21 फ्रिगेट हैं। अपनी सेवा अवधि से बहुत पहले ही ये जहाज अब लगातार महंगे रखरखाव की मांग करते हैं और इनके स्पेयर पार्ट्स या तो अनुपलब्ध हैं या पुराने हो चुके हैं। इसके अलावा, 2021 और 2023 के बीच वितरित किए गए नए चीनी टाइप-054A फ्रिगेट भी हैं, जिन्हें पाकिस्तान के नौसैनिक आधुनिकीकरण का प्रतीक माना जाता था। लेकिन वे भी रडार की गड़बड़ियों, प्रणोदन विफलताओं और न ठीक हो सकने वाली खामियों से ग्रस्त होकर सूखी गोदी में वापस आ गए हैं। कराची शिपयार्ड, जो पहले से ही बोझ तले दबा हुआ है, के पास इनकी मरम्मत के लिए डायग्नोस्टिक सिस्टम या सॉफ्टवेयर का अभाव है। चीनी इंजीनियरों को शामिल करने के प्रयास लागत और तकनीकी हस्तांतरण के मुद्दों के कारण रुक गए हैं। नतीजा? गश्त के लिए बनाए गए जहाज अब घाटों की शोभा बढ़ा रहे हैं। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इनमें से एक भी चीनी फ्रिगेट सक्रिय अभियानों में नहीं रहा है।

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