📰 भारत की प्रमुख महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस के अवसर पर बलिया के डवकरा हॉल में श्रद्धांजलि और सम्मान के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और नगर क्षेत्र के लोगों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।
🌟 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माली संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर माली रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले ने नारी शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए जिस साहस और संकल्प के साथ संघर्ष किया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है और सावित्रीबाई फुले ने इसे अपने जीवन से सिद्ध किया।
📜 वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ था। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। उस दौर में जब बेटियों की शिक्षा को अपराध माना जाता था, तब उन्होंने तमाम विरोध और अपमान सहते हुए शिक्षा की अलख जगाई।
🙏 कार्यक्रम में सुरेंद्र निसाद, बिरबल राजभर, बाबू राम वर्मा, हरिशंकर वर्मा, दिवाकर वर्मा और संजय वर्मा सहित अन्य लोगों ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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