🌍 बलिया: बलिया जनपद का इतिहास बहुत पुराना है। कहते हैं यह शहर तीन बार बसा है और अब दावा किया जा रहा है कि ‘पुरानी बलिया’ की भूमि आखिरकार प्रशासन को मिल गई है।
📜 शनिवार को मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने नगर से सटे दक्षिणी क्षेत्र में मखदूमही और ताजपुर मौजे में लगभग 10 एकड़ सरकारी भूमि को चिन्हित किया। राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज पाया गया है।
🏢 प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इसी भूमि पर कभी पुरानी बलिया जिला का कलेक्टरेट, तहसील, बलिया चौक और बलिया-सहतवार मार्ग स्थित थे। यह संपूर्ण क्षेत्र वर्तमान में नगर पालिका परिषद बलिया के अंतर्गत आता है।
🏗️ राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी उजागर जांच के दौरान सामने आया कि इस ऐतिहासिक सरकारी भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में मखदूमही और ताजपुर मौजे के नाम से निजी खातों में दर्ज कर दिया गया था। फिलहाल इस जमीन पर खेती के साथ-साथ प्लाटिंग भी की जा रही है।
🔍 सरकारी खाते में दर्ज होगी भूमि प्रशासन ने अब इस जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही, भूमि को फर्जी तरीके से दर्ज कराने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी उपजिलाधिकारी सदर को सौंपी गई है।
🛠️ सार्वजनिक उपयोग में लाई जाएगी जमीन सीआरओ त्रिभुवन ने बताया कि राजस्व टीम ने पुरानी बलिया की महत्वपूर्ण भूमि को चिन्हित कर लिया है और अन्य संबंधित जमीनों की तलाश भी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि-ग्राम मखदूमही में कलेक्टरेट, अस्पताल और चौक की भूमि, ग्राम ताजपुर में तहसील की भूमि को कब्जे में लेकर सार्वजनिक उपयोग में लाया जाएगा। सभी भूमि को सरकार के खाते में दर्ज कराया जाएगा।
🔄 लंबे समय से चल रही थी तलाश पुरानी बलिया की भूमि को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से प्रयास चल रहे थे, लेकिन स्पष्ठ चिन्हांकन नहीं हो पा रहा था। अब सीआरओ के नेतृत्व में हुई कार्रवाई से इस ऐतिहासिक जमीन की पहचान सुनिश्चित हो गई है।
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