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Ballia-उच्च शिक्षा संस्थानों में सख्त केंद्रीय कानून की मांग को लेकर बलिया में प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा

बलिया में सुरक्षा और समर्पण की भावना

🌟 बलिया में उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित जातीय भेदभाव और असुरक्षा के मुद्दे को लेकर, समांजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और देश के मुखिया न्यायाधीश के नाम ज्ञापन भेजा गया।

🗓️ जनपद के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और महिला छात्रों को आज भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। आरोप लगाया गया कि कई मामलों में अंक देने, शोध कार्य रोकने, फैलोशिप में देरी, मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

📜 सख्त केंद्रीय कानून की मांग प्रदर्शनकारियों ने “रोहित वेमुला स्मृति समानता एवं संरक्षण कानून” नाम से एक सख्त केंद्रीय कानून लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा यूजीसी नियम पर्याप्त नहीं हैं और उनमें कठोर दंड व स्वतंत्र जांच व्यवस्था का अभाव है।

🤝 वीरेंद्र साहनी, सुरेंद्र साहनी, जय भीम भारती, मनीष कुमार, अवधेश वर्मा, बलवंत कुमार, सोनू टैगोर आदि ने ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि जातीय भेदभाव को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।

🛡️ विश्वविद्यालय प्रशासन और अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए। छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों को भी कानून के तहत सुरक्षा मिले।

🏛️ स्वंतंत्र और पारदर्शी जांच तंत्र स्थापित किया जाए। अन्य मांगें भी उठीं इसके अलावा, आरक्षण के अनुपालन, छात्रवृत्ति व फैलोशिप की राशि बढ़ाने, फीस वापसी प्रक्रिया को सरल बनाने और निजी शिक्षण संस्थानों में भी सामाजिक न्याय के प्रावधान लागू करने की मांग रखी गई।

🔍 प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल मांग-पत्र नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित संस्थानिक पदाधिकारी इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे और ठोस कदम उठाएंगे।

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