🌍 समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता, बांसडीह विधानसभा से आठ बार निर्वाचित पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में शुक्रवार को निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। पिछले करीब दो वर्षों से वह हृदय रोग की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही बलिया समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
📰 वरिष्ठ राजनेताओं के संस्मरण, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से शोक संवेदना व्यक्त की। स्व. रामगोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1946 को हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा बलिया के टाउन डिग्री कॉलेज में हुई। रामगोविंद चौधरी ने वर्ष 1974 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा पास की। चौधरी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से 1982 में एलएलबी की परीक्षा पास की।
📚 राम गोविंद चौधरी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई थी। वह 1972 में टीडी कॉलेज के छात्रसंघ के महामंत्री बने और 1974 में अध्यक्ष रहे थे। इसी दौरान जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से घहरा जुड़ाव हुआ। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई में उन्होंने टीडी कॉलेज परिसर से ही गिरफ्तारी कर लिया गया था। इसके बाद करीब दो साल जेल में बिताए।
🏛️ जिस दिन चौधरी जी जेल से बाहर आए, उसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर बलिया में नामांकन के लिए आए थे। रामगोविंद चौधरी के जेल से बाहर निकलने के दिन उनके समर्थक में बहुत बड़ी संख्या में जुटे छात्रों को देख कर वह प्रभावित हुए और मिलने के लिए बुलाया। यही मुलाकात आगे चल कर दोनों के राजनीतिक संबंधों का आधार बनी।
🗳️ वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण तथा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से जुड़कर बलिया जनपद में राजनीति करने लगे। समाजवादी आंदोलन के प्रमुख लोगों में उनकी गिनती होती थी। उनकी शादी कलावती देवी से हुई थी। वर्ष 1977 में उन्होंने पहली बार चिलकहर विधानसभा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वह चिलकहर विधानसभा से पांच बार विधायक रहे।
🗓️ नए परिसीमन में चिलकहर विधानसभा समाप्त हो जाने के बाद वर्ष 2002 में रामगोविंद चौधरी ने सपा के चिह्न पर बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर कांग्रेस के दिग्गज नेता बच्चा पाठक के खिलाफ जीत दर्ज की थी। वह 2007 में फिर बांसडीह विधानसभा से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए बिस्पा के शिवशंकर चौहान से चुनाव हार गए।
🏆 रामगोविंद चौधरी ने वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़कर पहली बार भाजपा से चुनाव लड़ने वाली केतकी सिंह को परास्त किया था। वर्ष 2017 की प्रदेश में चल रही भाजपा लहर के बाद भी बांसडीह लहर के बाद भी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरी केतकी सिंह को भजपा गठबंधन से चुनाव लड़ रहे सुभासपा के अरविंद राजभर को परास्त किया था। वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया था। वर्ष 2022 के बांसडीह विधानसभा चुनाव में रामगोविंद चौधरी को भाजपा की केतकी सिंह से हार का सामना करना पड़ा था।
🏛️ रामगोविंद चौधरी तीन बार प्रदेश सरकार में मंत्री थे। एक बार नेता प्रतिपक्ष भी रहे। रामगोविंद चौधरी 1990 में उद्यान प्रसंस्करण मंत्री रहे। दूसरी बार वर्ष 2003 में मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में बाल विकास पुष्टाहार मंत्री बने। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में रामगोविंद चौधरी वर्ष 2012 से 2017 तक बेसिक शिक्षा व बाल विकास पुष्टाहार मंत्री पद पर कार्य किया। रामगोविंद चौधरी वर्ष 2017 से 2022 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर विराजमान रहे।
🏢 बांसडीह क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, बिजली व स्वास्थ्य के विकास कार्यों के लिए उन्होंने याद किया जाता है। उनके प्रयासों से बांसडीह के दुहीजान में राजकीय आईटीआई व हुसैनाबाद गांव में 21 करोड़ की लागत से राजकीय पॉलिटेक्निक का निर्माण हुआ। हुसैनाबाद में ही आश्रम पद्धति विद्यालय का भी निर्माण हुआ। रामगोविंद चौधरी ने हुसैनाबाद गांव में ही क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं की राहत के लिए के लिए 132/33 केवीए के बड़े पावर ग्रिड सबस्टेशन की स्थापना 58 करोड़ की लागत से करवाया। इससे बांसडीह क्षेत्र के मनियर, बांसडीह, सैदपुरा, बैसहा, रेवती विद्युत उपकेंद्र से जुड़े सौ से अधिक गांवों को बिजली मिलती है।
![]()

