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हम होने नहीं देंगे…शिया-सुन्नी भूलकर उम्माह के लिए एक! सऊदी ने ईरान से किया सबसे बड़ा वादा

अमेरिका की ओर से ईरान को लगातार सैन्य हमले की धमकियां दी जा रही हैं। लेकिन इसी तनाव के बीच इस्लामिक दुनिया में बड़ा और असामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है। शिया और सुन्नी मुस्लिम देशों के बीच दशकों से चले आ रहे मतभेद फिलहाल कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी हमले की आशंका के बीच कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि सऊदी अरब ने ईरान को ऐसा भरोसा दिया है जिसने पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है। सऊदी अरब ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इतना ही नहीं रियाद ने यह भी साफ किया है कि वह अपने एयर स्पेस से ऐसे किसी भी लड़ाकू विमान को गुजरने की अनुमति नहीं देगा जिसका मकसद ईरान पर हमला करना हो। 
सऊदी अरब ने तेहरान को सीधे तौर पर सूचित कर दिया है कि वह उसके खिलाफ की जाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा, और न ही उसके क्षेत्र और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जाएगा।

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सरकार के करीबी एक अन्य सूत्र ने पुष्टि की कि यह संदेश तेहरान को पहुंचा दिया गया है। अमेरिका के खाड़ी क्षेत्र में, सऊदी अरब सहित, सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।  यह संदेश ऐसे समय दिया गया जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने चेतावनी दी कि वह विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की कार्रवाई का जवाब दे सकता है, जबकि तेहरान ने कहा है कि नए हमले की स्थिति में वह अमेरिकी सैन्य और जहाजरानी संपत्तियों पर हमला करेगा।

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मतभेदों के चलते ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। मौजूदा रुख यह भी संकेत देता है कि क्षेत्रीय स्थिरता को अब वैचारिक मतभेदों से ऊपर रखा जा रहा है। सऊदी विदेश मंत्रालय की एक सूत्र ने एएफपी को बताया कि रियाद ने ईरान को साफ शब्दों में अवगत करा दिया है कि वह उसके खिलाफ किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा। साथ ही सऊदी अरब अपनी जमीन और एयर स्पेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा।  दूसरी तरफ अरब के अधिकारियों ने ट्रंप से हमले टालने का अनुरोध करने के अलावा वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों से भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक दमनकारी कार्रवाई समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान अमेरिका की किसी कार्रवाई के जवाब में अमेरिका या क्षेत्र में अन्य लक्ष्यों पर कोई प्रतिक्रिया देता है तो इसके ईरान के लिए गंभीर परिणाम होंगे। 

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