पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब पानी सिर के ऊपर बहने लगा है। देश पर इस समय करीब 4.8 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाने का भारी दबाव है। लेकिन कर चुकाना तो दूर अब दुनिया के बड़े-बड़े निवेशकों का भरोसा भी पाकिस्तान से पूरी तरह से उठ चुका है। नतीजा यह है कि विदेशी निवेश यानी एफडीआई तेजी से पतालोक में जा रहा है। कई बड़ी देसी और विदेशी कंपनियां पाक छोड़कर जा रही हैं। जानकार इस स्थिति के लिए उसकी विकास की जगह जिहादी सोच वाली पॉलिसी को दोष दे रहे हैं।
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टाइम्स ऑफ ओमान की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 में पाकिस्तान में आने वाला विदेशी निवेश करीब 33% गिरकर सिर्फ 1.19 अरब डॉलर रह गया है। साथियों जरा सोचिए साल 2023-24 में यह 1.92 अरब डॉलर था जो अगले साल गिरकर 1.83 अरब डॉलर हुआ और अब तो यह बिल्कुल औंधे मुंह गिर गया है। अगर देश की कुल जीडीपी के हिसाब से देखें तो विदेशी निवेश अब 0.45% से भी नीचे आ चुका है। बाहर का कोई भी देश अब पाकिस्तान में ₹1 भी लगाने को तैयार नहीं है। माहौल इतना खराब है कि कई मल्टीीनेशनल कंपनियां अब बुरिया बिस्तर समेटकर पाकिस्तान छोड़ रही हैं। साथियों, हाल ही में मशहूर कंपनी PNG ने अपना मैन्युफैक्चरिंग यूनिट वहां पर बंद करने का फैसला ले लिया। इसके अलावा शेल, टेलीनोर, Uber, Yamaha और एनी जैसे दिग्गज कंपनियां या तो पाकिस्तान से बाहर निकल चुकी हैं या अपना कारोबार समेट रही हैं। कई विदेशी बैंक और दवा कंपनियां भी देश छोड़कर भाग रही हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इस मंदी का पाकिस्तान के आम लोगों पर क्या असर हो रहा है। दरअसल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से इंपोर्ट यानी विदेशों से आने वाले सामान पर टिकी है। फ्यूल से लेकर खाने-पीने की चीजों तक सब बाहर से आता है। हर साल पाकिस्तान अपनी जीडीपी का करीब 4% हिस्सा सिर्फ खाड़ी देशों से तेल और फर्टिलाइजर खरीदने में उड़ा देता है।
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डॉलर की कमी के कारण अब देश में तेल और बिजली का भयंकर संकट पैदा हो गया है। हालात इतने बद से बदतर हो चुके हैं कि सरकार को बिजली बचाने के लिए स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं और दफ्तरों में काम के दिन घटाने पड़ रहे हैं। लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि देश में बेरोजगारी दर बढ़कर करीब 7% तक जा पहुंचा है। पाकिस्तान के ऊपर कर्ज का बोझ कितना है? इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वित्त वर्ष 2025 के आखिर तक देश का कुल सरकारी कर्ज बढ़कर करीब 80.52 ट्रिलियन रुपए हो गया है। वहीं बाहरी कर्ज भी 138 अरब डॉलर के पार जा पहुंचा है। यह कर्ज अब पाकिस्तान की कुल जीडीपी के करीब 70% के बराबर है। आर्थिक जानकारों का साफ कहना है कि अगर पाकिस्तान ने समय रहते अपनी आदतें सुधारी होती और कट्टरवाद, आतंकवाद या जिहादी सोच को पनपने नहीं देता और उसकी जगह विकास और आर्थिक सुधारों पर ध्यान दिया होता तो आज वो कंगाली की कगार पर नहीं खड़ा होता। आज दुनिया में उसकी छवि एक भिखारी देश जैसी नहीं बनी होती।