Breaking News

Xi Jinping-Putin in BRICS: एक जगह जब जमा होंगे तीनों, मोदी-पुतिन और जिनपिंग, दुनिया देखेगी दिल्ली की धमक!

विश्व में व्याप्त उथल-पुथल के बीच, भारत सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जो विश्व नेताओं की एक शक्तिशाली बैठक का मंच बनेगा। रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। दक्षिण अफ्रीका स्थित रूसी दूतावास ने दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन की भागीदारी की पुष्टि की है। रूसी समाचार एजेंसी तास की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है। इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी कि शी जिनपिंग नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले सकते हैं। सूत्रों के हवाले से खबर में कहा गया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग की भागीदारी सबसे बहुप्रतीक्षित यात्रा है।अगर शी जिनपिंग की भारत यात्रा संभव होती है, तो यह अक्टूबर 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी, जब उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

इसे भी पढ़ें: PM Modi से मुलाकात, BRICS Summit में हिस्सा, Vladimir Putin के दिल्ली दौरे पर क्रेमलिन से आया बड़ा अपडेट

जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों और दिसंबर 2022 में तवांग सीमा पर तनावपूर्ण गतिरोध ने भारत-चीन संबंधों पर गहरा असर डाला था। सीमा गतिरोध के बाद मोदी और शी जिनपिंग की पहली मुलाकात रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समय और इस समूह के दो प्रमुख देशों – रूस और चीन के नेताओं की उपस्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रमुख भू-राजनीतिक मुद्दों, विशेष रूप से ईरान युद्ध को लेकर समूह के भीतर स्पष्ट मतभेद दिखाई दे रहे हैं। 11 सदस्यीय ब्रिक्स समूह के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों के बीच 24 अप्रैल को नई दिल्ली में हुई वार्ता के बाद दरारें स्पष्ट हो गईं। वार्ता में कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव और इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत द्वारा प्रस्तावित कथित शब्दों में बदलाव को लेकर असहमति उभर आई। इससे राजनयिक गतिरोध उत्पन्न हो गया।

इसे भी पढ़ें: BRICS का व्यापार 13 गुना बढ़ा, पर Global Trade में हिस्सा सिर्फ 5%, India ने बताया आगे का प्लान

भारत, जिसने जनवरी 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की, अब इन आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और तेजी से ध्रुवीकृत हो रहे वैश्विक परिदृश्य में समूह को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार दिख रहा है। नई दिल्ली चीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। दक्षिण अफ्रीका 2010 में इसमें शामिल हुआ, जिससे ब्रिक का नाम बदलकर ब्रिक्स हो गया। हाल के वर्षों में, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और इंडोनेशिया के शामिल होने से इस समूह का और विस्तार हुआ है, जिससे इसका भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव काफी बढ़ गया है। ब्रिक्स को पश्चिमी वर्चस्व के लिए खतरा माना जाता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसकी आलोचना की है। उन्होंने इसे “अमेरिका विरोधी” गुट बताया और कहा कि यह डॉलर पर हमला है। लाई 2025 में रियो डी जनेरियो शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप ने कहा कि ब्रिक्स की नीतियों का समर्थन करने वाले किसी भी देश को अमेरिका में आयात पर 10% अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा। प की यह टिप्पणी ब्रिक्स नेताओं द्वारा अपने घोषणापत्र में अमेरिका के एकतरफा शुल्क और संरक्षणवाद पर चिंता व्यक्त करने के बाद आई। ट्रंप पहले भी इसी तरह की धमकियां दे चुके थे।

Loading

Back
Messenger