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Delhi में पहली बार CAPF Leadership Conference, PM Modi करेंगे अध्यक्षता, सुरक्षा पर होगा महामंथन

सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) के अधिकारियों के लिए अपनी तरह का पहला लीडरशिप कॉन्फ्रेंस देश की राजधानी में होने जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्रों की अध्यक्षता करने की उम्मीद है। मई में होने वाली इस उच्च-स्तरीय बैठक का मकसद भारत की तेज़ी से बदलती होमलैंड सिक्योरिटी स्थिति के संदर्भ में आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों से निपटना है। न्यूज़ एजेंसी ANI ने इस योजना से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।

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इस दो-दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य CAPF के वरिष्ठ नेतृत्व को एक साथ लाना है, ताकि गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले इन बलों के बीच एकजुट योजना और तालमेल की ज़रूरत को पूरा किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) इस कार्यक्रम के लॉजिस्टिक्स का जिम्मा संभाल रहा है और हो सकता है कि वह इस बैठक को एक सालाना कार्यक्रम का रूप दे दे, ठीक वैसे ही जैसे पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों की बैठक होती है। जानकारी के अनुसार, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के साथ-साथ CAPF कैडर के शीर्ष अधिकारियों के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है। अंतिम एजेंडा अभी भी तैयार किया जा रहा है, और चर्चाओं का मुख्य विषय नीति का क्रियान्वयन, परिचालन संबंधी चुनौतियाँ और उभरते आंतरिक सुरक्षा खतरों से निपटने की रणनीतियाँ होने की संभावना है।

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उच्च-स्तरीय उपस्थिति की उम्मीद

प्रधानमंत्री के अलावा, इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और प्रमुख खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के शामिल होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य एक ऐसा एकीकृत मंच तैयार करना है, जो CAPF के प्रयासों को राज्य पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा निकायों के साथ तालमेल बिठाने में मदद करे, जिससे वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें।

पांच बल, एक मंच

भारत के पांच प्रमुख CAPF में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) शामिल हैं; ये सभी मिलकर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में लगभग 10 लाख कर्मियों का योगदान देते हैं। इनकी जिम्मेदारियों में सीमा सुरक्षा, VIP सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी अभियान, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और राज्यों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहायता करना शामिल है।

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